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बुधवार, 8 दिसंबर 2010

मै लौटना चाहता हूँ




मै फिर से लौटना चाहता हूँ
उस एक पल की ओर
जहाँ पावों की धूल
ख़बरों में बदल जाती थी
वो एक कल मुझे दे सको तो दे दो
जहाँ मेरे छत की मुंडेर
गजलों की किताब थी और शहर एक नज्म
मै चाहता हूँ कि अपने झोले में रखे सारे आईने
पड़ोस की दूकान पर बेच आऊं
और झोले को पड़ोस वाली पहाड़ी पर बिखरे लाल पत्थरों से भर दूँ
मै अपने हाथों में लाल गुलाब की जगह
बेहया की टहनियां रखना चाहता हूँ
मै चाहता हूँ कि मेरी आँख या तो जमीन पर हो
या आसमान पर
मै चाहता हूँ उस एक जगह नंगे पाँव पहुँचजाऊं
जहाँ ना तो कोई इन्तजार था ,ना कोई उम्मीद
मै नहीं देखना चाहता हूँ उन चेहरों को
जो उस एक पल के इस पार थे
अपनी अपनी साजिशों के साथ
मुझे अपराधी बनाते हुए
अपनी अपनी मसीहाई का ढोल पीटते हुए

मंगलवार, 27 जुलाई 2010

कत्थई है प्यार


मेरा प्यार किसी ७० mm की फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं
जिसमे नायक ,नायिका से जब भी मिलता है
गीत गाता हुआ मिलता है
और ना ही ये तुम्हारे उम्र के एक हिस्से में गुम हो गए
उन पलों की परछाई है
जिनमे तुमने ढेर सारे उजाले बटोरे और ढेर सारी चांदनी ओढ़ी
मेरा प्यार गुलाब का फूल नहीं है
जिसे जब चाहो तब तुम अपने ड्राइंग रूम के गुलदस्तों में सजा लो
और सबकी निगाहों से मुझे सराहो
मेरा प्यार एक लम्बा इन्तजार है
वो इन्तजार
जहाँ सिर्फ भीगी ख़ामोशी होती है
मेरा प्यार एक बाढ़ है
जो मेरे भीतर छुपे तिलिस्म को तोड़ रहा है
मेरा प्यार उस राह की थकन है
जहाँ जिस्म खुद के खिलाफ विद्रोह करता है
बार- बार
जमे हुए रक्त से भरी शिराओं में स्थिर है
कत्थई है मेरा प्यार

बुधवार, 23 जून 2010

वो जो मुझमे शामिल है |






न जाने क्यूँ कर लेता हूँ मै तुम्हे खुद में शामिल
ये जानते हुए भी कि
परदेसी बादलों का मेरे शहर से रंज पुराना है
मेरी बातों का जो सिरा तुम तक पहुँचता है
वो कुछ इस तरह गुंथा होता है
जैसे अक्सर नहाने के बाद तुम्हारे जूड़े होते हैं
उन बातों में छुपी बातों को
सावधानी से निकलती तुम
अक्सर किसी ब्लेक एंड व्हाईट फिल्म की नायिका की
तरह हो जाती हो
जिसकी निगाह प्यार में या तो जमीन पर होती है या आसमान पर
तुम जानना चाहती हो उन कविताओं के बारे में
जो तुमने मुझे याद करके नहीं लिखी
उन ग़जलों के बारे में
जिन्हें लिखते वक़्त
रात की स्याही पन्नों पर उतर आई थी
मै जानता हूँ
मै तुममे या तुम्हारी कविताओं में कभी शामिल नहीं रहता
मगर मै होना चाहता हूँ
यही एक कोशिश कविता को कविता
और प्यार को प्यार बनाये रखती है

शनिवार, 1 मई 2010

वो जो उदास है ...........

आजकल वो एक उदास है
जिसके सपनो के दरवाजे /कई तालों में बंद हैं
और उन दरवाजों के आगे/ कोई राक्षस पहरा दे रहा है
न तो ताला खुलता है न ही राक्षस को नींद आती है
हाँ, ये जरुर है कि इस उदासी के बीच भी
उसके होठों का कम्पन
मेरी आँखों के चौराहे से होकर गुजरता है |
और मै /उन चौराहों पर बिखरे रंगों में सराबोर हूँ |
मै जानता हूँ उदासी की धूप ओढ़
उसने अपनी ग़जलों को रुखसत कर दिया है
और कागज़ पर/ मेरी हथेलियाँ चस्पा कर दी है
मै पूछता हूँ ,क्या ये दवा है ?
उसका वही सधा सा जवाब 'नहीं ये तकनीक है मेरे पुरुष "
जो मैंने अभी अभी सीखी है |
इस उदासी के बीच
उसकी आँखों के आंसू की कुछ बूंदें
बिटिया के बालों की लटों में खो गए है
चंद बूंदें / खिडकियों से झांकते गुलमोहर के पेडों में नजर आती है
उसने कुछ बूंदें
दूर सड़क पर रेंगते किसी साए को/ सिर्फ इसलिए दे दी
क्यूंकि शायद वो फिर कभी दुबारा आएगा
उसके आंसुओं की कुछ बूंदों ने /मेरे कलम की रोशनाई को
अब तक सुर्ख बना रखा है
उसकी ये उदासी ख़त्म करने की मेरी कोई भी कोशिश
उसे मुझसे दूर कर देती है |
इस उदासी के बीच
दरवाजों में लगे तालों पर /मैं मोम पिघलता देख रहा हूँ
वो अन्दर सपनों की दूसरी किस्त तैयार कर रही है
और हाँ ,राक्षस अब तक जाग रहा है |